Monday, October 12, 2009
एक हैरान करने वाली ख़बर
अमरीका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा को शान्ति का नोबल पुरस्कार दिया जाना इस वर्ष की सबसे बड़ी हैरान करने वाली ख़बर हैं इस पर यकीन करना मुझ जैसे साधारण व्यक्ति के बस से बाहर हैं ,बहुत बार सोचा ,ओबामा जी की कुंडली भी देखी पर समझ नही आया की यह हुआ कैसे कंही तो लगता हैं की कही यह नोबल पुरस्कार पहले से ही तो फिक्स नही था वैसे ऐसा होने की सम्भावना तो नही लगती क्यूंकि नोबल पुरस्कार दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता हैं और आजतक उनका कोई भी ग़लत चयन पुरस्कारों को लेकर तो सुनने में नही आया मगर फ़िर भी लगता हैं कुछ तो गड़बड़ हुआ ही हैं
Friday, October 9, 2009
एक बेटी का दर्द
प्रस्तुत छोटी सी कविता हमारी बिटिया श्रुतिका को जया जी द्वारा उसके स्कूल के होमवर्क हेतु लिखाई गई कविता के बोल इतने सुंदर लगे की मैं इन्हे आप सब को भी पढाना चाह रहा हूँ | कभी कभी एक छोटी सी बात भी बहुत बड़ा अर्थ समझा जाती हैं, प्रस्तुत कविता में मुझे ऐसे ही कुछ विचार एक बेटी के दर्द को बखूबी बयां करते हुए लग रहे हैं|
मैं हूँ एक बिटिया अलबेली
नही कभी किताबो से खेली
मम्मी पापा ये करती पुकार
लड़की को भी हैं, पढने का अधिकार
लड़का लड़की सब एक समान
यही हैं सर्व शिक्षा का अभियान
मिले सभी को शिक्षा और ज्ञान
तभी तो बढेगा देश का मान सम्मान
अपनी बिटिया को खूब पढाये और आगे बढाये ...................
मैं हूँ एक बिटिया अलबेली
नही कभी किताबो से खेली
मम्मी पापा ये करती पुकार
लड़की को भी हैं, पढने का अधिकार
लड़का लड़की सब एक समान
यही हैं सर्व शिक्षा का अभियान
मिले सभी को शिक्षा और ज्ञान
तभी तो बढेगा देश का मान सम्मान
अपनी बिटिया को खूब पढाये और आगे बढाये ...................
Thursday, October 8, 2009
हो रहा हैं भारत का उत्थान
आज सुबह जब पता चला की भारत के वैज्ञानिक "वी रामकृष्णन"जी को रसायन विज्ञानं में नोबल पुरस्कार दिया गया हैं तो बहुत खुशी हुई |एक ज्योतिषी होने के कारण इसका भान तो पहले से ही था जिसका उल्लेख मैंने इस ब्लॉग के मध्यम में भी किया था (भारत बनेगा नंबर वन )यह मैं दावे से कह सकता हूँ की यह तो सिर्फ़ शुरुआत भर हैं भारत आने वाले छः सालो में जबरदस्त तरक्की करेगा तथा विश्व पटल में अपना नाम दर्ज कराएगा|
जैसा की उल्लेख किया गया था की भारत खेल के क्षेत्र में भी काफ़ी अच्छी तरक्की करेगा वैसा होता प्रतीत भी हो रहा हैं पिछले कुछ महीनो से भारत क्रिकेट के अलावा भी अन्य खेलो में काफ़ी नाम कमा रहा हैं |सन २०१० व २०११ में भारत में ही बड़े खेलो का आयोजन हो रहा हैं, जिससे भारत विश्व में अपना लोहा मनवाएगा ऐसा मेरा विश्वास ही नही मानना भी हैं|................इति
जैसा की उल्लेख किया गया था की भारत खेल के क्षेत्र में भी काफ़ी अच्छी तरक्की करेगा वैसा होता प्रतीत भी हो रहा हैं पिछले कुछ महीनो से भारत क्रिकेट के अलावा भी अन्य खेलो में काफ़ी नाम कमा रहा हैं |सन २०१० व २०११ में भारत में ही बड़े खेलो का आयोजन हो रहा हैं, जिससे भारत विश्व में अपना लोहा मनवाएगा ऐसा मेरा विश्वास ही नही मानना भी हैं|................इति
Tuesday, October 6, 2009
कुछ फिल्मी खबरों की मरम्मत
आमिर खान की फ़िल्म का नाम" थ्री इडियट्स "
कौन? शाहरुख़,सलमान और सैफ
अक्षय की नई फ़िल्म "ब्लू"
"सिंह इस किंग" का यह हाल वैसे भी "कमबख्त इश्क" के बाद" ब्लू "फ़िल्म ही बन सकती हैं !
अमरीका में तीन भारतीय जुआ खेलते पकड़े गए
"कमीने""न्यूयार्क" में "दोस्ताना"दिखा रहे थे !
हरमन की नई फ़िल्म "व्हाट्स यौर राशिः "
भाई ऐसी फ़िल्म करोगे तो "२०५०" में ही "विक्टरी" मिलेगी !
नील नितिन मुकेश की" जेल"
बहुत जल्दी तरक्की हो रही हैं "जोह्नी गद्दार ""न्यूयार्क" के बाद "आ देखे ज़रा" "जेल "
शाहरुख़ की "माय नेम इज खान "
अच्छा होता अगर माय नेम इज बच्चन होती !
कौन? शाहरुख़,सलमान और सैफ
अक्षय की नई फ़िल्म "ब्लू"
"सिंह इस किंग" का यह हाल वैसे भी "कमबख्त इश्क" के बाद" ब्लू "फ़िल्म ही बन सकती हैं !
अमरीका में तीन भारतीय जुआ खेलते पकड़े गए
"कमीने""न्यूयार्क" में "दोस्ताना"दिखा रहे थे !
हरमन की नई फ़िल्म "व्हाट्स यौर राशिः "
भाई ऐसी फ़िल्म करोगे तो "२०५०" में ही "विक्टरी" मिलेगी !
नील नितिन मुकेश की" जेल"
बहुत जल्दी तरक्की हो रही हैं "जोह्नी गद्दार ""न्यूयार्क" के बाद "आ देखे ज़रा" "जेल "
शाहरुख़ की "माय नेम इज खान "
अच्छा होता अगर माय नेम इज बच्चन होती !
राज ठाकरे का मुंबई
फ़िल्म "वेक उप सिद "के लिए जिस तरह मशहूर निर्देशक "करण जौहर " ने मान्यवर" राज ठाकरे" से माफ़ी मांगी उसे देखकर तो ऐसा लगता हैं की राज ठाकरे हमारे देश के कानून से भी बड़े हैं ,करण जौहर की इस फ़िल्म में "मुंबई" को कई जगह "बम्बई" कहा गया हैं क्या इस बात से कुछ फर्क पड़ता हैं? सिर्फ़ इतना की राज ठाकरे जैसे लोगो की वजह से फ़िल्म को मुंबई और महाराष्ट्र में प्रर्दशित नही होने दिया जाता |
क्या मुंबई राज जी की हैं ?क्या करण ने राज से माफ़ी मांगकर नया ड्रामा तो नही किया? करण यह अच्छी तरह से जानते हैं की अपनी फ़िल्म को कैसे बेचना हैं कुछ पैसो की खातिर इस तरह की हरकत कर उन्होंने ना सिर्फ़ पब्लिसिटी बटोरी बल्कि फ़िल्म को न्यूज़ में भी ला दिया|
ऐसा ही कुछ अभी कुछ दिन पहले शाहरुख़ खान ने भी अपनी करण की ही फ़िल्म "माय नेम इज खान" के लिए भी किया था जब उन्होंने अमरीका में अपना नाम पूछे जाने पर "माय नेम इज खान "कहकर विवाद पैदा कर दिया था
शिक्षा -"बदनाम होंगे तो क्या नाम नही होगा ".......................
क्या मुंबई राज जी की हैं ?क्या करण ने राज से माफ़ी मांगकर नया ड्रामा तो नही किया? करण यह अच्छी तरह से जानते हैं की अपनी फ़िल्म को कैसे बेचना हैं कुछ पैसो की खातिर इस तरह की हरकत कर उन्होंने ना सिर्फ़ पब्लिसिटी बटोरी बल्कि फ़िल्म को न्यूज़ में भी ला दिया|
ऐसा ही कुछ अभी कुछ दिन पहले शाहरुख़ खान ने भी अपनी करण की ही फ़िल्म "माय नेम इज खान" के लिए भी किया था जब उन्होंने अमरीका में अपना नाम पूछे जाने पर "माय नेम इज खान "कहकर विवाद पैदा कर दिया था
शिक्षा -"बदनाम होंगे तो क्या नाम नही होगा ".......................
यहाँ खुदा वहां खुदा
राजधानी दिल्ली की किसी भी सड़क से गुजरो वहां आपको कुछ न कुछ काम होता हुआ नज़र आएगा |कही मेट्रो ट्रेन की वजह से, तो कही कौमन्वैल्थ गेम्स की वजह से, दिल्ली जबरदस्त तरीके से रात दिन बदलने की और अग्रसर हैं
लगता हैं दिल्ली अब विदेश के बड़े शहरों से मुकाबला करने वाली हैं परन्तु इन सब के चलते आम आदमी को कितना सफर करना पढता हैं यह तो बेचारा वही जानता हैं ऐसे में अक्सर यह शेर याद आ जाता हैं|
यहाँ खुदा वहां खुदा,यहाँ खुदा वहां खुदा .........जहाँ नही खुदा,वहां काम चल रहाँ हैं|
लगता हैं दिल्ली अब विदेश के बड़े शहरों से मुकाबला करने वाली हैं परन्तु इन सब के चलते आम आदमी को कितना सफर करना पढता हैं यह तो बेचारा वही जानता हैं ऐसे में अक्सर यह शेर याद आ जाता हैं|
यहाँ खुदा वहां खुदा,यहाँ खुदा वहां खुदा .........जहाँ नही खुदा,वहां काम चल रहाँ हैं|
Sunday, October 4, 2009
कांग्रेस का देश प्रेम
गाँधी जयंती के दिन जिस तरह से कुछ कांग्रेस सांसदों ने आलाकमान के आदेश पर दलितों के घर पर एक दिन बिताने का नाटक किया उसे देखकर तो अवश्य ही हमारे पूज्य बापू जी की आत्मा को कष्ट पहुँचा होगा सोनिया जी यह भूल गई की भले ही इस तरह की आदेशो का फरमान जरी कर उन्होंने एक अच्छा प्रयास किया था परन्तु इस तरह का उंच दर्जे का व्यावार करना उनके विदेशी होने की वजह से तो काबिलेतारीफ हैं पर हमारे भारतीय सांसदों हेतु यह करना निहायत ही बचकाना प्रयास साबित हुआ हैं इससे अच्छा तो यह होता की वह स्वयं दलितों को एक दिन अपने सांसदों के साथ बिताने का आदेश जारी करती जिससे उन दलितों को कुछ समय ही सही सांसदों जैसी ज़िन्दगी जीने का व मौज करने का मौका मिल जाता
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