१)हनुमान जी को कौन सा रूद्र अवतार माना जाता हैं और क्यों ?
2)ज्योतिष में "हीरा" रत्न किस ग्रह से सम्बंधित माना जाता हैं ?
Tuesday, December 1, 2009
Friday, November 27, 2009
मन्नाडे को दादासाहब फाल्के

२००७ के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में सर्वोच्च पुरस्कार "दादासाहब फाल्के" पुरस्कार हिन्दी फिल्मो के बेहतरीन व महान गायक "मन्नाडे" को दिया गया हैं जिसे देखकर व सुनकर बेहद खुशी की अनुभूति हुई ऐसा लगा की देर से ही सही आख़िर हमारे भारत वर्ष को मन्नाडे जैसे महान गायक की प्रतिभा का भान तो हुआ,उनके भारतीय सिनेमा को दिए गए योगदान के लिए उम्र के इस पडाव में उन्हें इस सम्मान से नवाज कर भारतीय सरकार ने यह तो जता ही दिया की उन्हें ऐसे महान लोगो की बहुत परवाह व ज़रूरत हैं
मन्नाडे जैसी शख्सियत कई सालो में एक बार ही धरा पर जन्म लेती हैं यह भी बड़े गर्व की बात हैं की उन्होंने हमारे भारत जैसे देश में जन्म लिया जहाँ उनकी बेहतरीन प्रतिभा का पूर्ण जलवा देखने को मिला तथा इस प्रतिभा के चलते उन्हें अब उचित सम्मान भी दिया गया हैंबहुत कम लोग ही जानते हैं की मन्नाडे ने अपनी संगीत यात्रा की शुरुआत बतौर संगीत निर्देशक की थी परन्तु बाद में उन्हें बतौर गायक प्रसिद्दी अधिक मिली,उन्होंने लगभग३५०० से अधिक गीत देश की विभिन्न भाषाओ में गाये हैंमन्नाडे की गायकी विश्वस्तरीय कलाकारों के समान हैं,शुरू शुरू में इन्हे मुख्यतया:शास्त्रीय गायन से सम्बंधित ही गाने ज्यादा गाने को दिए गए जिन्हें इन्होने बखूबी से गाकर अपना लोहा उस ज़माने के बड़े बड़े गायक दिग्गजों से भी मनवायाअपने ज़माने के मशहूर शोमेन राजकपूर जी के साथ इनकी जबरदस्त ट्यूनिंग जमी जिससे इस जोड़ी ने एक से बढकर एक सुपरहिट गीत दिए जो आज भी बेहद लोकप्रिय हैं
मन्नाडे के गाए हुए गीतों में दिल का हाल सुने दिल वाला,ए भाई ज़रा देख के चलो,लागा चुनरी में दाग छुपाऊ कैसे,पूंछो न कैसे मैंने रैन बिताई,हर तरफ़ अब यही अफसाने हैं,ये दोस्ती हम नही छोडेंगे,यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी,कस्मे वादे प्यार वफ़ा सब वादे हैं वादों का क्या,मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा,तू प्यार का सागर हैं आदि गीत आज भी भुलाये नही भूलतेबहुत कम लोग ही जानते हैं की श्री मन्नाडे ने श्री हरिवंश राय बच्चन के काव्य "मधुशाला" को भी अपनी आवाज़ दी हैंइसी उम्मीद के साथ की मन्नाडे जैसी शख्शियत आगे भी बतौर धरोहर हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी उन्हीके गाये गीत की कुछ पंक्तिया.......................... आयो कहाँ से घनश्याम से मैं यह लेख समाप्त कर रहा हूँ
दिल की कलम से
यह दिल के दिलकश गलियाँ हैं , यहाँ रंग सवरते रहते है
यहाँ जीत मैं कुछ खामोशी है , हार कभी चुप्पी ताने है
दिल की धड़कन के नगाडे हैं , कोई रंक नहीं सब राजवाडे है
लुट कर ही यहाँ आबाद हुए , न जाने कितनी मजनू हैं
यह "दिल की कलम से "विश्वनाथजी द्वारा प्रेषित किया गया हैं
दोस्त को जन्म दिन की बधाई
दोस्त तुम्हे देता मैं बधाई
निर्मल प्रेम में डुबो हरपल
चिर बसंत हो कभी न पतझर
रहो स्वस्थ , दिल न कभी हो भरी
दिल की आवाज़ दुआ येही दे हमारी
नगर तुम्हारा निपन कहलाता
झिलमिल जहाँ से नभ के तारे
साफ़ जहा जल, मन और थल है
दिल कुश , सुन्दर , सरल श्रमिक जन
जो आखिर सांस तक हार न जाने
यहाँ की बातें तुम मत पूछो
यहाँ की बस्ती धूमिल चंचल
गंगा भी बहती काली सी कल कल
मिटटी में हर पग की रगड़ की बू है
दिल छोटा और मन कुचला मैला
भरे सूर्य को जैसे डराता, मुट्ठी भर का खोखला अँधेरा
हाँ याद तुम्हारी कर के सब कुछ भूला
मन लगा खुश, न लगा अकेला
दोस्त की यादें दोस्त की बातें
रंगती मन मेरा सुनहला
दोस्त तुम्हे देता मैं बधाई
यह बधाई भरा लेख विश्वनाथजी ने भेजा
निर्मल प्रेम में डुबो हरपल
चिर बसंत हो कभी न पतझर
रहो स्वस्थ , दिल न कभी हो भरी
दिल की आवाज़ दुआ येही दे हमारी
नगर तुम्हारा निपन कहलाता
झिलमिल जहाँ से नभ के तारे
साफ़ जहा जल, मन और थल है
दिल कुश , सुन्दर , सरल श्रमिक जन
जो आखिर सांस तक हार न जाने
यहाँ की बातें तुम मत पूछो
यहाँ की बस्ती धूमिल चंचल
गंगा भी बहती काली सी कल कल
मिटटी में हर पग की रगड़ की बू है
दिल छोटा और मन कुचला मैला
भरे सूर्य को जैसे डराता, मुट्ठी भर का खोखला अँधेरा
हाँ याद तुम्हारी कर के सब कुछ भूला
मन लगा खुश, न लगा अकेला
दोस्त की यादें दोस्त की बातें
रंगती मन मेरा सुनहला
दोस्त तुम्हे देता मैं बधाई
यह बधाई भरा लेख विश्वनाथजी ने भेजा
आलू संग बैठे गाज़र
आलू संग एंट के बैठे था गाज़र, लेके नमक का चस्का
जीरा अलग करने को आया, पर यह खेल न तथा उसके बस का !
चने बह कर डूब रहे थे, सब बोले "छोले! छोले "
भूल सब गिला और शिकवा , चावल संग वो एक थाल में डोले
माखन से भींगी थी रोटी , गोल गरम नरम सी
परत परत में प्रेम समायी - "मैं खाने की रानी हूँ" - बैठी थाल मैं इसी भरम से !
प्याज़ भुनी थी भूरी सी , बलखाती, डोलती रस में
पनीर भी डूबा उसके प्यार में खाके प्रेम की कसमे !
इन सब का रंग देख जमी और ढीठ दही ने भी की मनमानी
हरे धनिया की कर के सवारी उच्छ्ली उसकी निर्मल जवानी !
इन पूरब के व्यंजन को देख पश्चिम में हुआ हडबडाहट
वो घबराकर दौड़ के लाये फलो से मिश्रित कस्टर्ड !
मीठी सौंफ ने थी ठण्ड में ओढ़ी हरी हरी सी चादर
चीनी भी उसको जा मिली गले, किया उसके प्रेम का आदर !
सच है मर्द के दिल के द्वार , जब जब सजते सुस्वादु व्यंजन
पाती है नारी वोह अचल प्रेम , बन माँ, बहना , और तन मन !
---- विश्वानि, दोपहर ३ के आस पास
इस कविता को विश्वनाथजी ने भेजा
जीरा अलग करने को आया, पर यह खेल न तथा उसके बस का !
चने बह कर डूब रहे थे, सब बोले "छोले! छोले "
भूल सब गिला और शिकवा , चावल संग वो एक थाल में डोले
माखन से भींगी थी रोटी , गोल गरम नरम सी
परत परत में प्रेम समायी - "मैं खाने की रानी हूँ" - बैठी थाल मैं इसी भरम से !
प्याज़ भुनी थी भूरी सी , बलखाती, डोलती रस में
पनीर भी डूबा उसके प्यार में खाके प्रेम की कसमे !
इन सब का रंग देख जमी और ढीठ दही ने भी की मनमानी
हरे धनिया की कर के सवारी उच्छ्ली उसकी निर्मल जवानी !
इन पूरब के व्यंजन को देख पश्चिम में हुआ हडबडाहट
वो घबराकर दौड़ के लाये फलो से मिश्रित कस्टर्ड !
मीठी सौंफ ने थी ठण्ड में ओढ़ी हरी हरी सी चादर
चीनी भी उसको जा मिली गले, किया उसके प्रेम का आदर !
सच है मर्द के दिल के द्वार , जब जब सजते सुस्वादु व्यंजन
पाती है नारी वोह अचल प्रेम , बन माँ, बहना , और तन मन !
---- विश्वानि, दोपहर ३ के आस पास
इस कविता को विश्वनाथजी ने भेजा
Saturday, November 21, 2009
बच्चो को भी पिलाये चाय
यदि आप दिनभर में ८ कप "चाय" अथवा ४०० मिलीग्राम "कैफीन" (कॉफ़ी,कोको) आदि लेते हैं तो यह ना सिर्फ़ आपके दिमाग को चुस्त-चौकन्ना रखता हैं, बल्कि आपको दिल के दौरे या स्ट्रोक से भी बचाता हैं | कैफीन के बारे में तैयार किए गए रिसर्च पेपरों की समीक्षा करने के बाद लन्दन में डायटीसियन डॉक्टर "कैरी रक्सटन" ने यह नतीजा निकाला हैं| उन्होंने यह भी कहा की चाय शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को भी कम करती हैं |चाय कॉफ़ी में पाए जाने वाले "एंटी ऑक्सीडेंट्स" शरीर को "फ्री रेडिकल्स" के हमले से बचाते हैं |इसलिए बच्चो को भी चाय पिलानी चाहिए यह जूस पीने से कही ज़्यादा बेहतर हैं |
Friday, November 20, 2009
फिट रहना हैं तो सोच समझ कर बोले
अमरीकी अध्यनकर्ताओ की माने तो जो जोड़े लड़ाई के समय एक दुसरे से सोच समझकर बात करते हैं उनके शरीर से तनाव सम्बन्धी प्रोटीन कम निकलता हैं व उनके इम्यून सिस्टम पर वैवाहिक तनाव का कम असर पड़ता हैं |
पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओ ने बताया की तनावग्रस्त लोगो में "साईंटोकिन्स" नामक कैमिकल्स ज्यादा पाए जाते हैं| ये प्रोटीन सेल्स द्वारा इम्यून सिस्टम में बनते हैं शरीर में इन प्रोटीन्स की ज़्यादा मात्रा का सम्बन्ध दिल की बीमारियो जैसे मधुमेह,आर्थराईटिस और कई किस्म के कैंसर से होता हैं |मुख्यशोधकर्ता प्रोफेसर जेनिफर ग्राहम ने कहा की अगर आप लोगो को तनाव महसूस करवाएंगे तो आप देखेंगे की उनमे प्रो इन्फ्लामेटरी साईंटोकिन्स जैसे की इंटरल्युकिन-६ और ट्युमर नेक्रोसिस फेक्टर एल्फा(टी एन एफ-एल्फा) की मात्रा बढ जाएगी |शोध में यह भी पाया गया की वह शब्द जिनका इस्तेमाल लोग तनावपूर्ण मौको पर अपने भाव स्पस्ट करने के लिए करते हैं |ये शब्द हैं क्यो,क्यूंकि, और कारण |इन शब्दों से पता चलता हैं की या तो लोग झगडे का अर्थ निकाल रहे हैं या इस बारे में काफ़ी गहराई से सोचते हैं| शोध के दौरान ४२ जोड़ो को २ सप्ताह के लिए अलग अलग सोने को कहा गया इसमे पता चला की तनाव के समय मूड पर नियंत्रण रखने वाले जोड़ो में टी एन एफ एल्फा,इंटरल्युकिन-६ साईंटोकिन्स की मात्रा में कम वृद्धि हुई |इससे पता चलता हैं की तनाव के समय सोच समझकर बातें करनी चाहिए, सोच समझकर कहे गए शब्द जोड़ो को फिट रखने में मददगार साबित होते हैं इस शोध के नतीजे हैल्थ साइकोलॉजी जर्नल में भी छपे हैं |तो अब आप भी सोचसमझ कर बोलिए और फिट रहिये |
पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओ ने बताया की तनावग्रस्त लोगो में "साईंटोकिन्स" नामक कैमिकल्स ज्यादा पाए जाते हैं| ये प्रोटीन सेल्स द्वारा इम्यून सिस्टम में बनते हैं शरीर में इन प्रोटीन्स की ज़्यादा मात्रा का सम्बन्ध दिल की बीमारियो जैसे मधुमेह,आर्थराईटिस और कई किस्म के कैंसर से होता हैं |मुख्यशोधकर्ता प्रोफेसर जेनिफर ग्राहम ने कहा की अगर आप लोगो को तनाव महसूस करवाएंगे तो आप देखेंगे की उनमे प्रो इन्फ्लामेटरी साईंटोकिन्स जैसे की इंटरल्युकिन-६ और ट्युमर नेक्रोसिस फेक्टर एल्फा(टी एन एफ-एल्फा) की मात्रा बढ जाएगी |शोध में यह भी पाया गया की वह शब्द जिनका इस्तेमाल लोग तनावपूर्ण मौको पर अपने भाव स्पस्ट करने के लिए करते हैं |ये शब्द हैं क्यो,क्यूंकि, और कारण |इन शब्दों से पता चलता हैं की या तो लोग झगडे का अर्थ निकाल रहे हैं या इस बारे में काफ़ी गहराई से सोचते हैं| शोध के दौरान ४२ जोड़ो को २ सप्ताह के लिए अलग अलग सोने को कहा गया इसमे पता चला की तनाव के समय मूड पर नियंत्रण रखने वाले जोड़ो में टी एन एफ एल्फा,इंटरल्युकिन-६ साईंटोकिन्स की मात्रा में कम वृद्धि हुई |इससे पता चलता हैं की तनाव के समय सोच समझकर बातें करनी चाहिए, सोच समझकर कहे गए शब्द जोड़ो को फिट रखने में मददगार साबित होते हैं इस शोध के नतीजे हैल्थ साइकोलॉजी जर्नल में भी छपे हैं |तो अब आप भी सोचसमझ कर बोलिए और फिट रहिये |
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