
Friday, November 27, 2009
मन्नाडे को दादासाहब फाल्के

दिल की कलम से
यह दिल के दिलकश गलियाँ हैं , यहाँ रंग सवरते रहते है
यहाँ जीत मैं कुछ खामोशी है , हार कभी चुप्पी ताने है
दिल की धड़कन के नगाडे हैं , कोई रंक नहीं सब राजवाडे है
लुट कर ही यहाँ आबाद हुए , न जाने कितनी मजनू हैं
यह "दिल की कलम से "विश्वनाथजी द्वारा प्रेषित किया गया हैं
दोस्त को जन्म दिन की बधाई
निर्मल प्रेम में डुबो हरपल
चिर बसंत हो कभी न पतझर
रहो स्वस्थ , दिल न कभी हो भरी
दिल की आवाज़ दुआ येही दे हमारी
नगर तुम्हारा निपन कहलाता
झिलमिल जहाँ से नभ के तारे
साफ़ जहा जल, मन और थल है
दिल कुश , सुन्दर , सरल श्रमिक जन
जो आखिर सांस तक हार न जाने
यहाँ की बातें तुम मत पूछो
यहाँ की बस्ती धूमिल चंचल
गंगा भी बहती काली सी कल कल
मिटटी में हर पग की रगड़ की बू है
दिल छोटा और मन कुचला मैला
भरे सूर्य को जैसे डराता, मुट्ठी भर का खोखला अँधेरा
हाँ याद तुम्हारी कर के सब कुछ भूला
मन लगा खुश, न लगा अकेला
दोस्त की यादें दोस्त की बातें
रंगती मन मेरा सुनहला
दोस्त तुम्हे देता मैं बधाई
यह बधाई भरा लेख विश्वनाथजी ने भेजा
आलू संग बैठे गाज़र
जीरा अलग करने को आया, पर यह खेल न तथा उसके बस का !
चने बह कर डूब रहे थे, सब बोले "छोले! छोले "
भूल सब गिला और शिकवा , चावल संग वो एक थाल में डोले
माखन से भींगी थी रोटी , गोल गरम नरम सी
परत परत में प्रेम समायी - "मैं खाने की रानी हूँ" - बैठी थाल मैं इसी भरम से !
प्याज़ भुनी थी भूरी सी , बलखाती, डोलती रस में
पनीर भी डूबा उसके प्यार में खाके प्रेम की कसमे !
इन सब का रंग देख जमी और ढीठ दही ने भी की मनमानी
हरे धनिया की कर के सवारी उच्छ्ली उसकी निर्मल जवानी !
इन पूरब के व्यंजन को देख पश्चिम में हुआ हडबडाहट
वो घबराकर दौड़ के लाये फलो से मिश्रित कस्टर्ड !
मीठी सौंफ ने थी ठण्ड में ओढ़ी हरी हरी सी चादर
चीनी भी उसको जा मिली गले, किया उसके प्रेम का आदर !
सच है मर्द के दिल के द्वार , जब जब सजते सुस्वादु व्यंजन
पाती है नारी वोह अचल प्रेम , बन माँ, बहना , और तन मन !
---- विश्वानि, दोपहर ३ के आस पास
इस कविता को विश्वनाथजी ने भेजा
Saturday, November 21, 2009
बच्चो को भी पिलाये चाय
Friday, November 20, 2009
फिट रहना हैं तो सोच समझ कर बोले
पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओ ने बताया की तनावग्रस्त लोगो में "साईंटोकिन्स" नामक कैमिकल्स ज्यादा पाए जाते हैं| ये प्रोटीन सेल्स द्वारा इम्यून सिस्टम में बनते हैं शरीर में इन प्रोटीन्स की ज़्यादा मात्रा का सम्बन्ध दिल की बीमारियो जैसे मधुमेह,आर्थराईटिस और कई किस्म के कैंसर से होता हैं |मुख्यशोधकर्ता प्रोफेसर जेनिफर ग्राहम ने कहा की अगर आप लोगो को तनाव महसूस करवाएंगे तो आप देखेंगे की उनमे प्रो इन्फ्लामेटरी साईंटोकिन्स जैसे की इंटरल्युकिन-६ और ट्युमर नेक्रोसिस फेक्टर एल्फा(टी एन एफ-एल्फा) की मात्रा बढ जाएगी |शोध में यह भी पाया गया की वह शब्द जिनका इस्तेमाल लोग तनावपूर्ण मौको पर अपने भाव स्पस्ट करने के लिए करते हैं |ये शब्द हैं क्यो,क्यूंकि, और कारण |इन शब्दों से पता चलता हैं की या तो लोग झगडे का अर्थ निकाल रहे हैं या इस बारे में काफ़ी गहराई से सोचते हैं| शोध के दौरान ४२ जोड़ो को २ सप्ताह के लिए अलग अलग सोने को कहा गया इसमे पता चला की तनाव के समय मूड पर नियंत्रण रखने वाले जोड़ो में टी एन एफ एल्फा,इंटरल्युकिन-६ साईंटोकिन्स की मात्रा में कम वृद्धि हुई |इससे पता चलता हैं की तनाव के समय सोच समझकर बातें करनी चाहिए, सोच समझकर कहे गए शब्द जोड़ो को फिट रखने में मददगार साबित होते हैं इस शोध के नतीजे हैल्थ साइकोलॉजी जर्नल में भी छपे हैं |तो अब आप भी सोचसमझ कर बोलिए और फिट रहिये |
Thursday, November 19, 2009
अब काले आलू का मज़ा लीजिये
काले रंग के अंगूर,गाज़र और चुकंदर के बाद अब "काला आलू" भी बाज़ार में आने वाला हैं इलाहाबाद के कृषि विश्वविधालय द्वारा विकसित यह आलू साधारण आलू से कही गुणा बेहतर हैं एंटीओक्सीडेंट से भरपूर होने से इसमे बढती उम्र का असर और कैंसर का जोखिम कम करने क्षमता भी हैं यह भी पाया गया हैं की साधारण आलू के मुकाबले काले आलू में दोगुना आयरन और सात गुणा कैल्सियम पाया गयासंस्थान के अनुसार प्रति १०० ग्राम काले आलू में १०६.२ किलो कैलोरी उर्जा मिलती हैं जबकि साधारण आलू से इतनी ही मात्रा से ९७ किलो कैलोरी प्राप्त होती हैं इस आलू में ७.७% स्टार्च,२३.५३% कार्बोहाईड्रेट के साथ ही प्रचुर मात्रा में विटामिन सी भी पाया जाता हैं यह आलू "एन्थोसाइनिन" नामक एंटीओक्सीडेंट के कारण अन्दर से बैंगनी दिखता हैं जो बुढ़ापे के लिए ज़िम्मेदार फ्री रेडिकल्स को मारने के साथ ही कैंसर की संभावनाओ को भी कम कर देता हैं इस आलू की अन्य खूबियो को जानने के लिए इसे बंगलोर स्थित आई आई एच आर भेजा गया हैं