Wednesday, March 10, 2010

भूख

गाड़ी तेजी से अपने गंतव्य की और दौड़ी जा रही थी अपनी सीट पर बैठा वह बार बार घडी की और देख रहा था,भूख के मारे बुरी हालत थी पिछले दो महीनो से पत्नी के अपने मायके चले जाने से ठीक से भोजन नहीं खा पा रहा था बाहर का खाना उसे वैसे भी भाता नहीं था, देखा गाड़ी कुछ धीमी होती जा रही हैं शायद कोई स्टेशन रहा हैं उसने सोचा गाड़ी रुकी, वह सर झुकाए भूख से बेहाल गर्दन नीची किये बैठा ही रहा अचानक उसके नथुनों से एक स्त्री की महक टकराई उसने सर उठाकर देखा एक ग़ज़ब की बाला उसकी सामने वाली सीट में आकर विराजित हुई थी जिसके छोटे तंग कपडे उसे निमंत्रण सा देते प्रतीत हो रहे थे बार बार चाहते हुए भी उसकी नज़र उस बाला की और उठ जाती थी अपनी पेट की भूख तो जैसे वो भूल ही गया था अब उसे एक नई भूख लग आई थी .......|

3 comments:

  1. बिरह-कमंडलु कर लिए, बैरागी दो नैन । .
    मांगे दरस मधूकरी, छकें रहें दिन-रैन

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  2. सुन्दर प्रस्तुति....बधाई !!
    ______________
    सामुदायिक ब्लॉग "ताका-झांकी" (http://tak-jhank.blogspot.com)पर आपका स्वागत है. आप भी इस पर लिख सकते हैं.

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