Monday, August 30, 2010

धिक्कार हैं दिल्ली पर

कल रविवार की सुबह जब अखबार देखा तो एक ऐसी खबर पढने को मिली जिसे पढकर ना सिर्फ अपने इंसान होने पर शर्म आई बल्कि दिल्ली में रहने के कारण और भी जलालत महसूस हुई,हिन्दुस्तान टाईम्स की फ्रंट पेज की खबर थी की शंकर मार्केट में एक स्त्री ने चार दिन पहले एक बच्ची को जन्म दिया और वह बिना सहायता के मर गयी उसकी बच्ची को कुत्ते खाने का प्रयास कर रहे थे(ऐसा उस स्त्री ने स्वयं अपनी मदद करने वाली को बताया की उसने खुद बच्चे को बाहर निकाला तथा उसकी नाल खींचकर अलग की ) तब किसी ने उसकी मदद की वह स्त्री जिसने उस बच्चे को बचाया उसे भी परेशान किया जा रहा हैं यहाँ विचारणीय बात यह हैं शंकर मार्केट एक अच्छे इलाके में पड़ता हैं जहाँ रोजाना हज़ारो सभ्य व अमीर व्यक्ति चलते हैं वहां जब यह स्त्री उस हालत में तड़फ रही थी क्या कोई  एक शख्स उसकी मदद नहीं कर सकता था कम से कम पुलिस को खबर तो की ही जा सकती थी कोई प्राणी चार दिन से सड़क में पड़ा तड़फ रहा हो और दिल्ली वाले उसकी मदद करने के बजाये तमाशा देख रहे हो क्या यही हमारे सभ्य समाज में रहने का आचरण हैं यह सब देखकर तो खुद को इंसान कहलाना भी बड़े शर्म की बात प्रतीत होता हैं |
यहाँ एक बात और भी विचार करने की हैं की जिस पत्रकार ने उस स्त्री की तस्वीरे खिंची हैं वह स्वयं भी एक स्त्री हैं उसने उस स्त्री की दर्द से तड़फते हुए तस्वीरे तो भेजी हैं तस्वीरे चार दिनों की हैं जिससे यह साबित होता हैं की उसे यह सब पता था बावजूद इसके उसने खबर बनाने के लिए उस स्त्री की मदद नहीं की क्या वह पहले दिन जब वो स्त्री दर्द से तड़फ रही थी उसकी किसी भी प्रकार से मदद नहीं कर सकती थी अगर यही हमारी दिल्ली का आधुनिकपन हैं तो धिक्कार हैं दिल्ली पर और उसमें रहने वालो पर.....................................   

3 comments:

  1. Bilkul aapki baat men dam hai.

    Kiran bedi ji ka ye kahna ki Delhi ke log swarthi hain..bilkul sach hai.
    Hmaare ek mitra aur jaane -maane kavi v Varisth patrakaar Shri Pradeep Vedwal ji ko ye khabher padhte hi kisi ki kahi gayee ye chand panktiyan yaad gai.

    jo ki men aapke liye likh raha hun.

    kisi ki lash phoolon se saji hoti hai
    aur kishi ki lash lawarish padhi hoti hai
    ye vdadrd Delhi vaalon zara Sambhalkar chalo
    n jaane kis mode par maut kadhi hoti hai.

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  2. कहते है की दिल्ली दिलवालों की है परन्तु इस घटना ने तो ये साबित कर दिया की दिल्ली बेदिल वालो की है न्यूज़ चैनेल में देख कर दिल दहल गया इतनी हिरदय विदारक घटना और उसे सिर्फ और किसी समाचार का एक अंग बनाने का प्रयास करना दुखदाई है

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